बीकानेर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव विद्यार्थियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में मन पर नियंत्रण, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली तनावमुक्त जीवन की महत्वपूर्ण कुंजी है। इसी उद्देश्य से राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के लोक प्रशासन विभाग एवं इस्कॉन के संयुक्त तत्वावधान में तनाव प्रबंधन विषय पर विशेष व्याख्यान एवं कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेंद्र कुमार पुरोहित ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थी जीवन में समय प्रबंधन और तनाव प्रबंधन का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को अनुशासित जीवनशैली, नियमित दिनचर्या तथा अपने आचार-विचार की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए।
लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण कुमार खत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने मन पर नियंत्रण रखने की कला सीखनी चाहिए, क्योंकि मन को सही दिशा देना ही जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार है।
कार्यक्रम की शुरुआत मन को नियंत्रित करने की कला पर आधारित एक लघु नाट्य मंचन से हुई। इसके बाद मुख्य वक्ता बीकानेर इस्कॉन समन्वयक संकर्षण प्रिय दास प्रभु ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अनियंत्रित मन तनाव का सबसे बड़ा कारण है। मन को नियंत्रित करने के लिए उसकी री-प्रोग्रामिंग आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने ‘गीगो प्रिंसिपल’ अर्थात ‘गुड इनपुट, गुड आउटपुट’ का मंत्र दिया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति जैसा विचार और वातावरण अपने जीवन में ग्रहण करता है, उसका प्रभाव उसके व्यवहार और जीवन पर भी पड़ता है।
उन्होंने बुरी आदतों और नकारात्मक संगत से दूर रहने की सलाह देते हुए जी.एस.एस. सिद्धांत यानी गुरु, साधु और शास्त्र के मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन तीनों के मार्गदर्शन से व्यक्ति अपने जीवन को सरल, सकारात्मक और तनावमुक्त बना सकता है।
संपूर्ण कार्यक्रम संवाद आधारित रहा, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और तनाव प्रबंधन से जुड़े विषयों पर अपने सवाल भी रखे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. इला चारण ने किया तथा अंत में श्रीमती सुमन कच्छावा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
