ऐतिहासिक विरासत से छेड़छाड़ पर राजपरिवार की आपत्ति, प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने उठाई आवाज

 

बीकानेर। बीकानेर की ऐतिहासिक विरासत और स्थापत्य कला के संरक्षण को लेकर बीकानेर राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने पब्लिक पार्क के ऐतिहासिक प्रवेश द्वार को उसके मूल स्वरूप में पुनः स्थापित करने की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, बीकानेर के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री और मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर ऐतिहासिक गेट्स के संरक्षण और पुनर्बहाली की मांग की है।

 

प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पब्लिक पार्क का निर्माण वर्ष 1937 में उनके परदादा स्वर्गीय महाराजा गंगासिंहजी के शासनकाल में करवाया गया था। ऐतिहासिक जूनागढ़ दुर्ग के निकट शहर के प्रमुख स्थान पर स्थित यह पार्क बीकानेर के विकास, आधुनिक नगर नियोजन और राजसी स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार, चार पत्थर के स्तंभों और चारों ओर बनी रेलिंग का निर्माण क्षेत्र विशेष के प्रसिद्ध दुलमेरा बलुआ पत्थर से किया गया था। इसकी डिजाइन लंदन के बकिंघम पैलेस के गेट्स की शैली से प्रेरित बताई गई है।

 

विशेषज्ञों की सलाह के बिना गेट हटाने पर जताई आपत्ति

 

पत्र में उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले पब्लिक पार्क का ऐतिहासिक मुख्य द्वार क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद विशेषज्ञों की सलाह लिए बिना जेसीबी मशीन से गेट को हटाया गया, जिससे इसके स्तंभों को भी नुकसान पहुंचा। इस कार्रवाई पर उन्होंने स्वयं और आमजन की ओर से आपत्ति दर्ज करवाए जाने का उल्लेख किया है।

 

प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी के अनुसार, उन्होंने मार्च 2022 में तत्कालीन जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री को भी इसकी प्रतिलिपि भेजी थी। उस समय ऐतिहासिक द्वार को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग उठाई गई थी तथा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी मिला था।

 

तीन प्रवेश मार्गों वाले स्वरूप में बदलाव पर चिंता

 

उन्होंने हाल ही में समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि ऐतिहासिक गेट्स के मूल स्वरूप में बदलाव किया गया है। पहले चार स्तंभों और तीन प्रवेश मार्गों वाली संरचना में मध्य के स्तंभ हटाकर इसे दो स्तंभों वाले खुले प्रवेश द्वार का रूप दिए जाने पर उन्होंने चिंता जताई है। उनके अनुसार, इस बदलाव से ऐतिहासिक संरचना की मूल बनावट, सुंदरता और विरासत का महत्व प्रभावित होता है।

 

विशेषज्ञों की निगरानी में हो संरक्षण कार्य

 

प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने कहा कि महाराजा गंगासिंहजी द्वारा निर्मित ऐतिहासिक इमारतें और स्मारक बीकानेर की पहचान एवं गौरव हैं। इनके निर्माण में तत्कालीन विशेषज्ञों की सलाह, समय, धन और श्रम लगाया गया था। ऐसी धरोहरों की मरम्मत, पुनर्बहाली और संरक्षण का कार्य भी विशेषज्ञों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए, ताकि इनके मूल स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखा जा सके।

 

उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक इमारतों के जीर्णोद्धार अथवा नवीनीकरण से पहले राजपरिवार के सदस्यों से परामर्श लिया जाना उपयोगी हो सकता है। परिवार के पुराने अभिलेखों और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के माध्यम से संरक्षण कार्य में मार्गदर्शन मिल सकता है।

 

प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि पब्लिक पार्क के ऐतिहासिक गेट्स को जल्द से जल्द मूल स्वरूप में पुनः स्थापित करवाया जाए तथा भविष्य में ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में विशेष सावधानी बरती जाए।

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