बीकानेर। जूनोटिक रोगों की समय पर पहचान और प्रभावी रोकथाम के लिए सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में संचालित सेंटिनल सर्विलांस साइट की तैयारियों का शुक्रवार को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने जांच सुविधाओं, लैब की गुणवत्ता, रोग निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था का जायजा लेकर भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की।
एनसीडीसी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सहायक निदेशक डॉ. जितेश कुवातड़ा ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संचालित साइट का निरीक्षण किया। इस दौरान डॉ. सोहनटप्पन और डॉ. अनु नागर भी मौजूद रहे।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सीनियर प्रोफेसर एवं प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. अंजलि गुप्ता के निर्देशन में अप्रैल 2023 से संचालित इस साइट की प्रगति रिपोर्ट को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. दीप शिखर आचार्य ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यहां वर्तमान में ब्रुसेलोसिस, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस और इकाइनोकोकोसिस की जांच की जा रही है। जल्द ही टॉक्सोप्लाज्मोसिस की जांच सुविधा भी शुरू की जाएगी।
साइट पर सैंपल संग्रहण से लेकर जांच और रिपोर्टिंग तक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जा रही है। साथ ही आईडीएसपी टीमों के साथ समन्वय रखते हुए संबंधित पोर्टल पर नियमित डेटा दर्ज किया जा रहा है। रोगों की रोकथाम के लिए जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ मेडिकल एवं वेटरनरी विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान टीम ने माइक्रोबायोलॉजी लैब की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं और ट्रॉमा सेंटर स्थित एंटी रेबीज क्लिनिक का भी जायजा लिया। भविष्य में ब्रुसेला की कल्चर एवं मॉलिक्यूलर जांच, रेबीज निदान और क्यूजीआईएस के उपयोग से संबंधित अतिरिक्त प्रशिक्षण की जरूरत पर चर्चा की गई।
एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि जूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। कॉलेज में जांच एवं रोग निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ आधुनिक जांच सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि समय पर रोग पहचान और विश्वसनीय जांच का लाभ आमजन तक पहुंच सके।
