एमजीएसयू का बड़ा फैसला: कॉलेजों को दो माह की मोहलत, फिर अंतिम नोटिस और कार्रवाई

बीकानेर, 26 अक्टूबर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) की विद्या परिषद् ने संबद्ध महाविद्यालयों की संबद्धता शर्तों की पालना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। परिषद् ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में निर्धारित शर्तें पूरी करने के लिए महाविद्यालयों को दो माह का समय देने का निर्णय लिया है। निर्धारित अवधि में शर्तों की पालना नहीं होने पर संबंधित महाविद्यालयों को अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा और आगामी सत्र की संबद्धता के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित विद्या परिषद् की विशेष बैठक में संबद्धता शुल्क को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के समान करने तथा शोध शुल्क का पुनर्निर्धारण करने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

 

पांच लाख की एफडीआर बनानी होगी

 

विद्या परिषद् ने संबद्ध महाविद्यालयों के लिए एंडोमेंट फंड के तहत पांच लाख रुपये की एफडीआर बनवाने का निर्णय लिया। यह एफडीआर विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं संबंधित महाविद्यालय के संयुक्त नाम से न्यूनतम पांच वर्ष की अवधि के लिए होगी।

 

परिषद् ने यह भी निर्णय लिया कि जो संबद्ध महाविद्यालय दो माह के भीतर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की निर्धारित संबद्धता शर्तों की पालना पूरी कर लेंगे, उनके शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक की संबद्धता अभिवृद्धि से जुड़े प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। इसमें न्यायिक प्रकरण शामिल नहीं होंगे। निर्धारित समय में शर्तें पूरी नहीं करने वाले महाविद्यालयों को अंतिम नोटिस जारी कर आगामी सत्र की संबद्धता के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

प्रोफेसरों की अस्थायी नियुक्ति नीति को अनुशंसा

 

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. उमेश शर्मा के अनुसार, बैठक में विजिटिंग प्रोफेसर, एडजंक्ट प्रोफेसर, मानद प्रोफेसर और प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की अस्थायी नियुक्ति के लिए तैयार नीति एवं दिशा-निर्देश-2026 को विद्या परिषद् ने अनुशंसित किया।

 

परीक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए बनेगी समिति

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षा व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। परीक्षा की समयावधि, प्रश्नपत्र प्रणाली, अंतिम वर्ष के सेमेस्टर में शेष रह गए प्रश्नपत्रों की पूरक परीक्षा तथा स्वयंपाठी विद्यार्थियों से लिए जाने वाले महाविद्यालय प्रायोगिक शुल्क के उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों में संशोधन के लिए समिति गठित की जाएगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर निर्णय लेने के लिए कुलगुरु को अधिकृत किया गया।

 

बैठक में सभी संकायाध्यक्षों के साथ राज्यपाल द्वारा नामित सदस्य प्रो. नारायण हेड़ा, राज्य सरकार द्वारा नामित सदस्य प्रो. अभिलाषा आल्हा एवं प्रो. श्याम लाल सहित विभिन्न विषयों के संयोजक उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों का उद्देश्य संबद्धता व्यवस्था को व्यवस्थित करने, शैक्षणिक प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बनाने तथा विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विकसित करना है।

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