बीकानेर। उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल की ओर से बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को लालगढ़ स्टेशन यार्ड में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसमें रेलवे, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सिविल डिफेंस, चिकित्सा विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया। अभ्यास के दौरान रेल दुर्घटना की काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों, चिकित्सा सहायता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया।
ट्रेन के दो कोच पटरी से उतरने की बनाई गई स्थिति
मॉक ड्रिल के तहत गाड़ी संख्या 19720 (सूरतगढ़-जयपुर) के लालगढ़ स्टेशन यार्ड में प्रवेश के दौरान सुबह 11:11 बजे दो कोच पटरी से उतरने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। सूचना मिलते ही ट्रेन मैनेजर ने स्टेशन मास्टर को अवगत कराया। इसके बाद स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल के माध्यम से उच्चाधिकारियों को सूचना दी। अधिकारियों के निर्देश पर सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (SPART) और दुर्घटना राहत गाड़ी (ART) को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित अन्य संबंधित एजेंसियों को भी सूचित किया गया।
अभ्यास के दौरान एक स्लीपर कोच के दूसरे स्लीपर कोच के ऊपर चढ़ने जैसी स्थिति दर्शाई गई। इसके बाद राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। रेलवे अस्पताल लालगढ़, राजकीय अस्पताल बीकानेर, अग्निशमन विभाग, स्काउट एवं गाइड तथा सिविल पुलिस का भी सहयोग लिया गया।
आधुनिक उपकरणों से बचाव कार्य, 38 घायलों को निकालने का अभ्यास
एनडीआरएफ की टीम ने आधुनिक तकनीकी उपकरणों और प्रशिक्षित कार्मिकों की सहायता से बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। सबसे पहले घटनास्थल की घेराबंदी कर अनावश्यक भीड़ को दूर किया गया। लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को धैर्य बनाए रखने और बचाव दलों का सहयोग करने की अपील की गई।
मॉक ड्रिल में कुल 38 घायलों को कोचों से बाहर निकालने और उन्हें प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने का अभ्यास किया गया। आवश्यकता के अनुसार घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से रेलवे अस्पताल, राजकीय अस्पताल और निजी अस्पतालों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई। इस दौरान रेलवे, सरकारी एवं निजी अस्पतालों तथा 108 सेवा सहित कुल सात एंबुलेंस की भागीदारी रही। चिकित्सा दल ने घायलों की सूची तैयार करने और कोचों में किसी अन्य घायल के शेष नहीं रहने की पुष्टि करने की प्रक्रिया भी पूरी की।
ड्रोन और लाइव प्रसारण से रखी गई निगरानी
मॉक ड्रिल की पूरी प्रक्रिया की ड्रोन कैमरे से निगरानी और फोटोग्राफी की गई। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने घटनास्थल से लाइव प्रसारण की व्यवस्था की, जिसे मंडल कार्यालय और रेलवे मुख्यालय के डिजास्टर मैनेजमेंट रूम में मौजूद अधिकारियों ने देखा। इसके साथ ही हेल्पलाइन काउंटर स्थापित कर टेलीफोन नंबरों की कार्यशीलता भी जांची गई।
जनसंपर्क विभाग ने मीडिया को जानकारी उपलब्ध कराने, हेल्पलाइन नंबर जारी करने और घायलों के परिजनों से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। वाणिज्य, यांत्रिक, इंजीनियरिंग, संरक्षा, चिकित्सा, परिचालन, सिग्नल एवं दूरसंचार तथा कार्मिक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
डीआरएम ने सफल घोषित की मॉक ड्रिल
दोपहर 12:15 बजे मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल ने मॉक ड्रिल को सफल घोषित किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान सभी संसाधनों ने रेलवे के निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य किया। उन्होंने असिस्टेंट एनडीआरएफ श्री प्रवीण कुमार, वैभव सुहानी, चीफ रोलिंग स्टॉक, जयपुर मुख्यालय, सतबीर जाजड़ा, सीएमओ तथा उनकी टीमों सहित सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग की सराहना की।
वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अजय सिंह सेंगर ने भी अभ्यास में भाग लेने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सभी एजेंसियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक राजेंद्र सिंह चौधरी सहित मंडल के विभिन्न विभागों के शाखा अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
इस संयुक्त मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा प्रबंधन से जुड़े संसाधनों की कार्यशीलता, राहत एवं बचाव दलों की तत्परता, चिकित्सा सहायता, संचार व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को परखना था। रेलवे प्रशासन के अनुसार अभ्यास निर्धारित मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
