बीकानेर, 31 अक्टूबर। इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने के चलते आगामी मार्च- अप्रैल माह तक क्षेत्र में चारे की कमी ना हो, इसके लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक स्थानीय किसानों को चारा उत्पादन से जोड़ने के अतिरिक्त प्रयास करेंगे।
विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्रों, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्रों द्वारा किसानों के साथ विशेष प्रशिक्षण, प्रदर्शन आयोजित कर जई, जौ एवं रिजका की खेती करने के प्रोत्साहित किया जाएगा।
कुलगुरु डॉ राजेंद्र बाबू दुबे ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर वैज्ञानिकों को इस संदर्भ में प्रोएक्टिव होकर कार्य करने के निर्देश दिए।
कुलगुरु डॉ दुबे ने कहा कि इस बार मानसून के कम सक्रिय रहने के चलते आगामी मार्च अप्रैल तक स्थानीय स्तर पर पशु चारे की उपलब्धता की समस्या ना बने , इसके लिए स्थानीय किसानों को रबी सीजन में चारा उत्पादन से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय समन्वित चारा अनुसंधान परियोजना के तहत वैज्ञानिक आवश्यक समन्वय कर किसानों को चारा उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर किसानों के आय सृजन का अतिरिक्त साधन भी सृजित होगा।
उन्होंने कहा कि विशेषकर रबी में उगायी आने वाली फसलें जैसे जई, जौ एवं रिजका की खेती करने के लिए प्रेरित करने , बीज उपलब्ध करवाने एवं तकनीकी जानकारी देने के निर्देश दिए। अनुसंधान निदेशक डॉ एन के शर्मा ने कहा कि इसके लिए सक्रिय संवाद आवश्यक है। सोशल मीडिया ग्रुप्स के माध्यम से भी किसानों से जानकारी साझा हो । कृषि विज्ञान केन्द्र प्रशिक्षण व खेतों पर अधिक से अधिक प्रदर्शन कर किसानों को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
अखिल भारतीय चारा अनुसंधान परियोजना के प्रभारी प्रो अमर सिंह गोदारा ने परियोजना में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र बीकानेर प्रभारी डॉ मदन लाल रैगर ने चारा प्रदर्शनों के आयोजन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कार्य योजना से अवगत करवाया ।
बैठक में निदेशक अनुसंधान डॉ. एनके शर्मा, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ दीपाली धवन, डीन पीजी आर के वर्मा, कृषि अनुसंधान केन्द्र के प्रभारी डॉ भूपेंद्र सिंह शेखावत सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
