
बीकानेर।रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में साध्वीश्री मुक्तांजनाश्री जी म.सा. की पावन निश्रा में जैन धर्म में आत्म-शुद्धि, शांति और मंगल की कामना के लिए शांति स्नात्र महापूजा का अनुष्ठान किया रविवार काे किया गया। इसमें तीर्थंकर भगवान की प्रतिमा का जल, दूध और अन्य पवित्र द्रव्यों से अनुष्ठानिक स्नान किया जाता है, जो पवित्रता का प्रतीक है। यह पूजा संसार में शांति, जीवों पर करुणा और विघ्न-बाधाओं के निवारण के लिए की जाती है। सुगंधित औषधियों व फूल, धूप, दीप, दूध, फल एवं मिठाई से पूजा की गयी। ट्रस्ट के सहमंत्री मनीष नाहटा ने बताया कि साध्वीश्री मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने चातुर्मासिक नित्य प्रवचन में कहा कि श्रद्धालु के जीवन में थोड़ी सी भी भक्ति प्रभु कृपा दिला देती है। उन्हाेंने कहा कि ईश्वर को दिखावा नहीं, केवल आपका सच्चा भाव और छोटी सी श्रद्धा चाहिए। सच्चे मन से उठाया गया एक छोटा सा कदम भी प्रभु तक पहुंच जाता है। प्रेम और भक्ति कभी छोटी नहीं होती। जब मन में श्रद्धा होती है, तो प्रभु हर परिस्थिति में अपने भक्त की सुधि लेते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। उन्हाेंने कहा कि जब आपकी नीयत पवित्र होती है, तो आपका छोटा सा प्रयास भी महान बन जाता है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना हमेशा स्वीकार होती है।
पर्यूषण पर्व 8 सितम्बर से, पांच महाव्रतों की पालना करते हुए अधिकाधिक साधना, प्रभु भक्ति करेंगे श्रावक श्राविकाएं
ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि जैन धर्म का आत्म, परमात्म साधना, आराधना का पर्यूषण पर्व श्रावक-श्राविकाएं 8 से 15 सितम्बर तक मनाएंगे। पर्यूषण पर्व के दौरान जिनालयों में पूजा, मंत्र जाप, स्वाध्याय, सवर, पौषध, सामायिक, विभिन्न तरह की तपस्यों की आयोजन होंगे। अनेक श्रावक-श्राविकाएं पर्युषण पर्व के दौरान पांच महाव्रतों की पालना करते हुए अधिकाधिक साधना, प्रभु भक्ति करेंगे।
ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया ने बताया कि रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगनजी महाराज के उपासरे में चार्तुमास कर रहे साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा.के सान्निध्य में 8 से 15 सितम्बर तक पर्युषण पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक नियमों व स्वाध्याय की शुरूआत, खाद्य संयम दिवस, स्वाध्याय दिवस, आत्म चिंतन और स्वाध्याय, सामायिक दिवस पर तप, तप और साधना व अधिकाधिक सामायिक, वाणी संयम दिवस, व्रत चेतना दिवस, जप दिवस, पौषध, ध्यान दिवस, आत्म परमात्म चिंतन व संवत्सरि पर्व मनाया जाएगा तथा खमत खामण दिवस मनाया जाएगा।