
बीकानेर। साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने शनिवार काे कहा कि शरीर और मन का गहरा संबंध होता है, हम जैसा अन्न ग्रहण करते हैं, वैसी ही हमारी मानसिकता और विचार बनते हैं।
रांगड़ी चौक स्थित श्री सुगनजी महाराज के उपासरे में साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने शरीर का पाप से पोषण न करने पर चातुर्मासिक प्रवचन देते हुए कहा कि अपनी इंद्रियों और देह को अनैतिक, असत्य या हिंसक कर्मों से दूर रखना और सात्विक जीवन अपनाना चाहिए। साथ ही सात्विक आहार और नैतिक कर्म ही व्यक्ति को आत्मिक शांति और समाज में सम्मान दिलाते हैं। उन्हाेंने यह भी कहा कि यदि शरीर का पोषण गलत या पाप के मार्ग से आए धन/अन्न से होगा, तो विचार भी वैसे ही दूषित होंगे। इसलिए शरीर को सदाचार, संयम और पवित्र कर्मों में ही प्रवृत्त रखना ही ‘पाप से पोषण न करना’ कहलाता है।
उन्हाेंने कहा कि ताजे फल, सब्जियां, दूध, घी, अनाज, मेवे और ईमानदारी से कमाया गया सादा भोजन सात्विक कहलाता है। यह मन को शांत, पवित्र, एकाग्र और बुद्धि को सही-गलत का निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि रविवार काे दाेपहर 12 बजे सुगज जी महाराज के उपासरे में ही शांति स्नात्र महापूजन हाेगा। जिसमें सैकड़ाें श्रावक-श्राविकाएं भाग लेंगे। अनुष्ठान में अष्टप्रकारी पूजा, आरती और शांति कलश के माध्यम से समस्त संसार में शांति, सद्भाव और समृद्धि की प्रार्थना की जाएगी।
ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया ने बताया कि आज साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. के चातुर्मासिक नित्य प्रवचन के बाद तपस्वियाें का बहुमान किया गया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के सहमंत्री मनीष नाहटा ने किया।