
बीकानेर। साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने रविवार काे पर्युषण पर्व के छठे दिन जैन धर्म में भगवान महावीर के जीवन चरित्र और विशेष रूप से उनके प्रथम शिष्य गौतम स्वामी के केवलज्ञान की कथा का श्रवण किया। कल्पसूत्र के वाचन के दौरान इस दिन का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।
रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगन जी महाराज के उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने कल्पसूत्र वाचन और पाठशाला गमन, गौतम स्वामी का केवलज्ञान व इस दिन के मुख्य कर्तव्य भी बतलाए।
साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने इस दिन भगवान महावीर के बाल्यकाल में पाठशाला जाने (ज्ञानार्जन की शुरुआत) के प्रसंग का वर्णन किया। उन्हाेंने कहा कि यह प्रसंग समाज को शिक्षा, संस्कार और स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देता है। उन्हाेंने कहा कि पर्युषण पर्व का यह छठा दिन हमें सिखाता है कि सांसारिक ज्ञान से ऊपर उठकर आत्म-ज्ञान (केवलज्ञान) की ओर कदम बढ़ाना ही जीवन का असली लक्ष्य है। उन्हाेंने बतलाया कि गौतम स्वामी को भगवान महावीर के प्रति गहरा राग (मोह) था। जब प्रभु महावीर का मोक्ष हुआ, तब गौतम स्वामी का वह राग छूटा और उन्हें समझ आया कि आत्मा अकेली है। मोह और अहंकार के पूरी तरह नष्ट होते ही उन्हें केवलज्ञान प्रकट हो गया।
ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया, सहमंत्री मनीष नाहटा, ट्रस्टी संदीप मुसरफ ने विभिन्न व्यवस्थाएं देखीं। गुलगुलिया ने बताया कि उपासरे के पास ही महावीर भवन में एकासना करने वाले श्रावक-श्राविकाओं के लिए अभी तक एकासना लाभ लेने वालाें में सुंदरलाल प्रदीप सेठी परिवार व कंवरलाल मनीष कुमार नाहटा परिवार व लक्ष्मीचंद जी दुग्गड़ परिवार शामिल रहा।