बीकानेर। कुछ लोग शारदीय नवरात्रि में अष्टमी एवं नवमी व्रत की तिथियों को लेकर भ्रमित हैं। आज लोग अपने पंचांग पर विश्वास करने के बजाय सोशल मीडिया पर प्रसारित राशियों से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए तिथि एवं पर्व के निर्णय के लिए सोशल मीडिया नहीं, बल्कि प्रमाणिक पंचांग एवं अपने पुरोहित का आश्रय लें। यह कहना है संभाग मुख्यालय के युवा ज्योतिष मार्तंड तरुण एस भोजक का। उन्होंने बताया कि महाअष्टमी व्रत का निर्णय पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर को प्रातः 8 बजकर 29 मिनट तक सप्तमी तिथि है। उसके उपरान्त अष्टमी तिथि प्रारम्भ हो रही है। अर्थात् सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने के कारण 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि ही मानी जाएगी। इस प्रकार सूर्योदय के समय दो दिन अर्थात् 17 व 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि होने से सप्तमी तिथि की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि 19 अक्टूबर को प्रातः 10 बजकर 52 मिनट तक अष्टमी तिथि विद्यमान है। उसके उपरान्त नवमी तिथि लग रही है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि जिस दिन सूर्योदय के समय के पश्चात एक घड़ी तक अष्टमी तिथि विद्यमान हो, उसी दिन महाअष्टमी का व्रत करना चाहिए। 19 को सूर्योदय के बाद 1 से अधिक घड़ी तक अष्टमी तिथि है, अतः 19 महाअष्टमी व्रत 19 अक्टूबर को किया जाएगा। ज्योतिष मार्तंड तरुण एस भोजक के मुताबिक शास्त्र का वचन है शुक्लपक्षेष्टमी चैव शुक्लपक्षे, चतुर्दशी, पूर्वविद्धा न कर्तव्या कर्तव्या परसंयुता..। अर्थात् शुक्ल पक्ष की अष्टमी व्रत के लिए बाद वाली लेनी चाहिए, न कि पहले वाली। प्रथम पूज्य गणपतिजी के परम् उपासक पंडित भोजक ने बताया कि महानवमी एवं कन्या पूजन का निर्णय धर्मशास्त्रों के अनुसार, यदि नवमी तिथि अष्टमी के दिन सायंकाल में तीन मुहूर्त से अधिक व्याप्त हो, तो नवमी पहले दिन ग्रहण करनी चाहिए। यदि तीन मुहूर्त से कम व्याप्त हो, तो दूसरे दिन ग्रहण करनी चाहिए। 20 अक्टूबर को नवमी तिथि सायंकाल को स्पर्श भी नहीं कर रही है, जबकि 19 के दिन सायंकाल में नवमी व्याप्त है। इसलिए महानवमी एवं कन्या पूजन 19 अक्टूबर को ही किया जाएगा। विजयादशमी एवं दशहरा का निर्णय की जानकारी देते हुए पंडित भोजक ने बताया कि दशहरा के लिए संपूर्ण अपराह्नकाल में दशमी तिथि की व्याप्ति होनी चाहिए। 20 अक्टूबर को संपूर्ण अपराह्नकाल में दशमी तिथि के साथ श्रवण नक्षत्र भी विद्यमान है। वहीं 21 अक्टूबर को न तो संपूर्ण अपराह्नकाल में दशमी तिथि की व्याप्ति है और न ही श्रवण नक्षत्र का संयोग है। इसलिए विजयादशमी एवं दशहरा का पर्व 20 अक्टूबर को शास्त्रसम्मत है। श्रद्धावान सनातनी लोगों के लिए अपने विशेष संदेश में उन्होंने कहा कि अतः संशयरहित होकर अपने पंचांग के अनुसार व्रत एवं पर्व मनाएँ। वे प्रार्थना करते हैं कि माँ भगवती सभी पर अपनी कृपा बनाए रखे।
