
बीकानेर, 4 अक्टूबर। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त झिझक, भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने तथा आमजन को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पीबीएम अस्पताल के मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग में रविवार को सात दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का शुभारंभ हुआ। 4 से 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण सत्र, कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस वर्ष मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह की थीम ‘वास्तविक जीवन की अनुभूतियां : वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव’ रखी गई है। इसके माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को केवल मरीज के रूप में देखने के बजाय उनके अनुभवों, भावनाओं और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को समझने का संदेश दिया जा रहा है। साथ ही मरीजों और उनके परिजनों की आवाज को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की योजना और उपचार व्यवस्था में महत्व देने पर जोर दिया जा रहा है।
पोस्टर विमोचन के साथ हुई जागरूकता गतिविधियों की शुरुआत
मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के पहले दिन विभाग में पोस्टर विमोचन के साथ गेटकीपर ट्रेनिंग, ‘आई सपोर्ट माय फ्रेंड’, ‘युवा मन एवं मानसिक स्वास्थ्य’, एग्जाम स्ट्रेस मैनेजमेंट और वर्कप्लेस स्ट्रेस मैनेजमेंट सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. श्रीगोपाल गोयल, सहायक आचार्य डॉ. मुरलीधर स्वामी, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अर्चना अग्रवाल, रेजिडेंट डॉ. मनीषा, डॉ. अनामिका सहित नर्सिंग स्टाफ, मरीज एवं उनके परिजन मौजूद रहे।
‘स्वस्थ मन ही स्वस्थ जीवन की पहचान’
विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तनाव, चिंता, अवसाद अथवा मानसिक दबाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते अपनी भावनाओं को समझना और परिवार तथा मित्रों से संवाद करना जरूरी है। आवश्यकता महसूस होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेने में किसी भी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग और सकारात्मक सोच मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह उपचार योग्य हो सकती हैं, इसलिए समय पर सहायता और उपचार लेना आवश्यक है।
डॉ. मुरलीधर स्वामी ने कहा कि योग, ध्यान, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को दैनिक जीवन में उचित स्थान देना चाहिए। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क एक-दूसरे से जुड़े हैं तथा दोनों के बीच संतुलन बेहतर जीवन के लिए आवश्यक है।
QPR मॉडल से समझाया—संकट में फंसे व्यक्ति की कैसे करें मदद
जूनियर रेजिडेंट डॉ. मनीषा चौधरी ने गेटकीपर मॉड्यूल के अंतर्गत QPR यानी Question, Persuade, Refer मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संकट अथवा आत्महत्या के जोखिम की समय रहते पहचान कर संबंधित व्यक्ति को सहायता एवं विशेषज्ञ उपचार तक पहुंचाने की एक प्रशिक्षण पद्धति है।
उन्होंने बताया कि इसके तीन प्रमुख चरण हैं—व्यक्ति से संवेदनशीलता के साथ बात करना और पूछना, उसे सहायता लेने के लिए प्रेरित करना तथा उचित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या सेवा तक पहुंचाना। संकट के संकेत दिखाई देने पर व्यक्ति की बात बिना किसी निर्णयात्मक रवैये के सुनना, उसे अकेला न छोड़ना और पेशेवर मदद से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
आदर्श विद्या मंदिर में नशा मुक्ति की अलख, दिलाई शपथ
मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तहत आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगाशहर में नशा मुक्ति कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने नशे से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक नुकसान, बचाव और उपचार के संबंध में जानकारी दी। इस दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई तथा सरकार की विभिन्न संबंधित योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई के विनोद पंचारिया एवं राजी राम ने सक्रिय भूमिका निभाई।
विभाग की ओर से बताया गया कि 10 अक्टूबर तक चलने वाले मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के आगामी दिनों में भी आमजन, युवाओं, विद्यार्थियों और विभिन्न वर्गों के बीच मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा मुक्ति को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।