बीकानेर। दशहरे पर जब लंकेश का विशालकाय स्वरूप, गूंजता अट्टहास और आग उगलती आंखें दर्शकों के सामने आती हैं, तो वातावरण रोमांच से भर उठता है। रामायण के इस चर्चित पात्र को जीवंत करने की परंपरा बीकानेर में पिछले 71 वर्षों से एक ही परिवार निभा रहा है। बीकानेर दशहरा कमेटी के दशहरा उत्सव में रावण की भूमिका निभाने वाले पत्रकार एवं कलाकार के. कुमार आहूजा अपनी दमदार कद-काठी, प्रभावशाली संवाद अदायगी और खतरनाक अट्टहास के चलते दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
इस अनूठी परंपरा की शुरुआत परम पूजनीय माधवदास आहूजा ने की थी, जिन्होंने 23 वर्षों तक रावण की भूमिका निभाई। इसके बाद पूर्व आयकर अधिकारी शिवाजी आहूजा ने 25 वर्षों तक इस विरासत को आगे बढ़ाया। अब तीसरी पीढ़ी के के. कुमार आहूजा इस परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं। तीन पीढ़ियों का यह सफर बीकानेर के दशहरा उत्सव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
लंकेश का अट्टहास और ‘सीते-सीते’ की गूंज
के. कुमार आहूजा जब रावण के स्वरूप में झांकी के साथ निकलते हैं, तो उनका अंदाज देखते ही बनता है। उनकी बुलंद आवाज में ‘सीते-सीते’ की गूंज और राम-लक्ष्मण को युद्ध के लिए ललकारने का दृश्य दर्शकों में रोमांच पैदा करता है। रावण के किरदार में उनकी भाव-भंगिमाएं, विशाल व्यक्तित्व और दमदार अट्टहास इस प्रस्तुति को खास बनाते हैं।
हालांकि, के. कुमार आहूजा रावण की छवि को केवल भय और आतंक तक सीमित नहीं रखना चाहते। वे अपने अभिनय के माध्यम से बच्चों के बीच भी उत्साह और खुशी बांटने का प्रयास करते हैं। झांकी के मार्ग में बच्चों को ट्रॉफियां और बिस्कुट वितरित किए जाते हैं। जितेंद्र मारवा के सौजन्य से होने वाला यह वितरण रावण के इस रूप को एक अलग पहचान देता है।
रावण परिवार के नाम से मशहूर है आहूजा परिवार
बीकानेर में आहूजा परिवार को रावण परिवार के नाम से भी जाना जाता है। इस परंपरा की एक दिलचस्प बात यह है कि के. कुमार आहूजा की पत्नी कांता आहूजा को पड़ोसी प्यार से ‘मंदोदरी भाभी’ कहकर पुकारते हैं। खास बात यह है कि कांता आहूजा भी इस पहचान को गर्व के साथ स्वीकार करती हैं।
दशहरे के साथ इतिहास में जुड़ता है एक और वर्ष
बीकानेर का दशहरा उत्सव केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वर्षों से चली आ रही पारिवारिक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत भी शामिल हैं। के. कुमार आहूजा के परिवार के लिए प्रत्येक दशहरा सेवा, समर्पण और परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और अवसर लेकर आता है।
तीन पीढ़ियों की 71 वर्षों की यह विरासत बताती है कि कुछ किरदार केवल मंच पर नहीं निभाए जाते, बल्कि परिवार की पहचान और शहर की परंपरा बन जाते हैं। इस बार भी के. कुमार आहूजा अपने चिर-परिचित अंदाज में दर्शकों का मनोरंजन करेंगे और आहूजा परिवार की गौरवशाली परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ेंगे।
