
बीकानेर, 03 अक्टूबर 2026।
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सख्त रुख अपनाया है। कुलगुरु ने आज विश्वविद्यालय क्षेत्राधिकार के अंतर्गत भादरा स्थित विभिन्न महाविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने दायित्व ग्रहण करने के समय ही स्पष्ट संदेश दिया था कि विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में नॉन-अटेंडिंग व्यवस्था को समाप्त करते हुए विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं संचालित की जाएं। विद्यार्थियों को पात्र एवं योग्य शिक्षकों के माध्यम से नियमित अध्यापन कार्य करवाने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक शैक्षणिक एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
इसी क्रम में कुलगुरु ने 03 अक्टूबर 2026 को भादरा स्थित श्री श्याम महिला महाविद्यालय, श्री श्याम सह शिक्षा महाविद्यालय, श्री श्याम शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालय, श्री बाल गंगाधर तिलक महाविद्यालय, एकलव्य महाविद्यालय एवं श्री गोदारा शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि कुलगुरु के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान उक्त महाविद्यालयों में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ के साथ विद्यार्थी भी उपस्थित नहीं पाए गए। निरीक्षण के दौरान श्री श्याम शिक्षण संस्थान द्वारा आवश्यक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं करवाया गया।
निरीक्षण में सामने आई इन अनियमितताओं को कुलगुरु ने गंभीरता से लेते हुए संबंधित महाविद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश प्रदान किए।
कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालय के लिए विद्यार्थी हित सर्वोपरि है। संबद्ध महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय के नियमों एवं संबद्धता की शर्तों का पूर्ण रूप से पालन करना होगा। महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित करने के साथ पात्र एवं योग्य शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्यापन उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा के अनुरूप आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी संबद्ध महाविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालय के निर्देशों की अवहेलना की जाती है अथवा संबद्धता की निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित महाविद्यालय के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करते हुए संबद्धता समाप्ति तक की कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
कुलगुरु के इस आकस्मिक निरीक्षण से संबद्ध महाविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट संदेश गया है कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की शिक्षा, नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण अध्यापन व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।